लोन लेने से पहले लोन देने वाली कंपनी या loan app की जाँच कैसे करें

छोटा जवाब: बैंक और रजिस्टर्ड NBFC से मिलने वाले लोन ऐसी कंपनियों से आते हैं जिन पर RBI की निगरानी है (यानी RBI नियम बनाकर उन्हें नियंत्रित करता है)। यह तब भी सच है जब आप किसी app से अप्लाई करते हैं, और ज़्यादातर loan app किसी बैंक या NBFC के लिए काम करते हैं। लोन लेने से पहले चार काम करें। लोन देने वाली कंपनी का क़ानूनी नाम पता करें। उसे RBI की सूचियों में जाँचें। देखें कि app, RBI की डिजिटल लोन app वाली सूची में है। और पक्का करें कि आपको Key Facts Statement मिले। अगर कोई app यह छिपाता है कि लोन असल में कौन दे रहा है, पहले से फ़ीस माँगता है, या आपके कॉन्टैक्ट और फ़ोटो माँगता है, तो उसका इस्तेमाल न करें।
app का नाम ≠ लोन देने वाली कंपनी
बहुत से loan app ख़ुद लोन देते ही नहीं। वे लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (LSP) होते हैं: ऐसी कंपनियाँ जो किसी बैंक या NBFC (RBI में रजिस्टर्ड, बैंक से अलग फ़ाइनेंस कंपनी) के लिए ग्राहक ढूँढती हैं और app चलाती हैं। इसकी इजाज़त है। लेकिन RBI के Digital Lending Directions (2025) कहते हैं कि app को साफ़-साफ़ दिखाना होगा कि लोन कौन-सी रेगुलेटेड (RBI के नियमों के तहत) कंपनी दे रही है। आपके KFS और लोन एग्रीमेंट में भी उसी कंपनी का नाम होना चाहिए।
जाँच के 5 कदम
1. लोन देने वाली कंपनी का क़ानूनी नाम पता करें। app का “About” या “Our lending partners” पेज, KFS और सैंक्शन लेटर (वह चिट्ठी जो आपके लोन की पुष्टि करती है) देखें। आपको “XYZ Finance Private Limited” जैसा नाम चाहिए, सिर्फ़ app का ब्रांड नाम नहीं।
2. जाँचें कि कंपनी रजिस्टर्ड है। बैंकों के नाम RBI की वेबसाइट पर हैं। NBFC के लिए RBI रजिस्टर्ड कंपनियों की एक सूची और उन कंपनियों की एक सूची छापता है जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका है: https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_NBFCList.aspx. Excel या PDF फ़ाइल में ठीक वही क़ानूनी नाम खोजें।
3. जाँचें कि app, RBI की डिजिटल लोन app वाली सूची में है। RBI उन app की सूची छापता है जिन्हें रेगुलेटेड कंपनियाँ अपना बताती हैं। rbi.org.in → Citizen’s Corner → “DLAs deployed by Regulated Entities” पर जाएँ और app का नाम खोजें। RBI यह सूची कंपनियों की दी हुई जानकारी से बनाता है, और कहता है कि वह ख़ुद इस सूची की जाँच नहीं करता। इसलिए अगर app सूची में है, तो वह किसी रेगुलेटेड कंपनी से जुड़ा है, लेकिन इससे लोन सस्ता या आपके लिए सही नहीं हो जाता। अगर app सूची में नहीं है, तो यह ख़तरे का बड़ा संकेत है।
4. लोन स्वीकार करने से पहले KFS माँगें। KFS (Key Facts Statement, मुख्य तथ्य विवरण) एक छोटा पन्ना है, जिसमें लोन देने वाली कंपनी का नाम, APR, सभी फ़ीस और कुल चुकाने वाली रकम लिखी होनी चाहिए। APR का मतलब है पूरी सालाना लागत, ब्याज और फ़ीस मिलाकर। डिजिटल लोन में कम से कम 1 दिन की कूलिंग-ऑफ़ अवधि भी होती है। इस समय में आप बिना जुर्माने के लोन से बाहर निकल सकते हैं। आप उधार ली गई रकम लौटाते हैं, और जितने दिन पैसा आपके पास रहा उतने दिनों की लागत (APR)। अगर KFS में लिखा है, तो कंपनी एक छोटी, एक बार की प्रोसेसिंग फ़ीस भी रख सकती है।
5. जाँचें कि पैसा कहाँ जाता है। RBI के नियमों के अनुसार लोन का पैसा कंपनी से सीधे आपके बैंक खाते में आना चाहिए। आपकी किस्तें सीधे कंपनी को जानी चाहिए, किसी और के निजी खाते में नहीं।
ख़तरे के संकेत: ये दिखें तो पीछे हट जाएँ
- लोन मिलने से पहले फ़ीस (लोन “रिलीज़” करने के लिए “प्रोसेसिंग”, “बीमा” या “GST” के नाम पर)
- app आपके कॉन्टैक्ट, फ़ोटो या फ़ाइलें माँगता है। असली app को KYC (आपकी पहचान की जाँच) के लिए आपकी मंज़ूरी से एक बार कैमरा या लोकेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। उसे आपका पूरा फ़ोन नहीं चाहिए।
- लोन देने वाली कंपनी का नाम नहीं, या ऐसी कंपनी जो RBI की सूचियों में नहीं मिलती
- KFS नहीं, या app में ऐसे चार्ज जो KFS में नहीं हैं
- किसी निजी UPI ID या किसी एक व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजने को कहना
- धमकियाँ, या किस्त में देर होने पर आपके कॉन्टैक्ट को मैसेज भेजना
- “कोई काग़ज़ नहीं, CIBIL जाँच नहीं, तुरंत ₹5 लाख” जैसे वादे। (CIBIL एक क्रेडिट ब्यूरो है, यानी ऐसी कंपनी जो आपके पुराने लोन का रिकॉर्ड रखती है।)
अगर आप पहले ही किसी संदिग्ध app का इस्तेमाल कर चुके हैं
- लोन “अनलॉक” करने या बंद करने के लिए कोई “अतिरिक्त फ़ीस” न दें।
- सबूत सँभालकर रखें: स्क्रीनशॉट, मैसेज, भुगतान की रसीदें, और app का नाम और वेबसाइट।
- अगर आपके साथ धोखाधड़ी, धमकी या परेशान करने वाला बर्ताव हो रहा है, तो 1930 पर कॉल करें या यहाँ शिकायत दर्ज करें: https://cybercrime.gov.in. बिना इजाज़त काम करने वाली कंपनियों की शिकायत आप RBI के Sachet पोर्टल पर भी कर सकते हैं: https://sachet.rbi.org.in
- फ़ोन की सेटिंग में जाकर app की परमिशन बंद करें, फिर उसे अनइंस्टॉल कर दें।
- अगर कंपनी रेगुलेटेड है, तो उसके शिकायत अधिकारी (grievance officer, यानी शिकायतें सुनने वाला व्यक्ति) से शिकायत करें। 30 दिन बाद आप RBI लोकपाल (Ombudsman) के पास जा सकते हैं (https://cms.rbi.org.in, 14448)। लोकपाल RBI का वह दफ़्तर है जो बैंकों और दूसरी लोन देने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ शिकायतें सुनता है।
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ। परेशान करने वाले इसी उम्मीद में रहते हैं कि आप अकेला और शर्मिंदा महसूस करेंगे। मदद माँगना ग़लत नहीं है।
आज क्या जाँचें
- अपने फ़ोन के हर loan app के लिए लोन देने वाली कंपनी का क़ानूनी नाम पता करें।
- जाँचें कि हर कंपनी RBI की NBFC सूची में है (या बैंक है) और app, DLA सूची में है।
- जिन परमिशन या app का अब इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें हटा दें।
स्रोत और समीक्षा
- RBI — Digital Lending Directions, 2025 (8 May 2025): https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=12848
- RBI — Digital Lending Directions और Digital Lending Apps की सार्वजनिक सूची पर प्रेस विज्ञप्ति (8 May 2025): https://rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=60403
- RBI — रजिस्टर्ड/रद्द NBFC की सूची: https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_NBFCList.aspx
- RBI — 28 Nov 2025 से डिजिटल लोन के नियम Credit Facilities Directions, 2025 (NBFC संस्करण) में हैं: https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_ViewMasDirections.aspx?id=12957
- RBI Sachet पोर्टल: https://sachet.rbi.org.in
- National Cyber Crime Reporting Portal: https://cybercrime.gov.in
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